जो नज़र आता है वो अपना नहीं
जो नज़र आता है वो अपना नहीं, और जो अपना है वो नज़र आता नहीं। गुम हो गया हूँ कहीं “उजाले” में भाई, मुझसे मेरी पहचानकरा दे “राही” …..( एन. पी. सिंह )Read More →
जो नज़र आता है वो अपना नहीं, और जो अपना है वो नज़र आता नहीं। गुम हो गया हूँ कहीं “उजाले” में भाई, मुझसे मेरी पहचानकरा दे “राही” …..( एन. पी. सिंह )Read More →
यूँही नहीं चिराग़ मैंने, हवा में जला दिया….मुद्दतों से लड़ा हूँ लड़ाई, दुष्वारियों से मैं….न कभी अश्क़ बहाएन कभी शिकायत की है….ये मेरी अपनी खता है जो हिमाकत की है….नफ़रतों के दरम्यां दिलको दिल से मिला दिया….यूँही नहीं चिराग़ मैंने, हवा में जला दिया…. ………….(एन. पी. सिंह )Read More →
Memories of childhood were the dreams that stayed with you after you woke. Being a kid was much more fun than being an adult. Life was sweeter then.Read More →
क्यों पूछता है “राही”मैं पहले सा नहीं हूँ,शक्ल तो वही है बस”दिवंगत” हो गया हूँ,तू ढूँढता है जिसको वोह अब मैं नहीं हूँ,काया तो है पहले सीपर मैं कहीं नहीं हूँ,था कभी निगाहों मेंअब भी वहीं डटा हूँ,तब भी “खटकता” था अब भी खटक रहा हूँ,”रिश्तों” की बारात में कुछRead More →
अब दूरियाँ बना ही रहे हो तो बरक़रार भी रखना,हम क़रीब नहीं आएंगे हम पर एतबार भी रखना !! तमाम उम्र कटेगी यूँ ही…वो सामने ना होगी.. फिर भी दिखेगी… ये शायरी ओर किनके लिए…हक़ है तुम्हारा इनपे.. तुम्हारी है, नाज़ करो…Read More →
मैंने कोरोना का रोना देखा है!और उम्मीदों का खोना देखा है!! लाचार मजदूरों को रोते देखा है!गिरते पड़ते चलते और सोते देखा है! पिता को सूनी आंखों से तड़पते देखा है!!तो मां की गोद में बच्चे को मरते देखा है! गरीबों का खुलेआम रोष देखा है!!तो मध्यमवर्ग का मौन आक्रोशRead More →
मैं तेरे इश्क की औकात दैखना चाहता हूं , और इसलिए …….. क्या मसरूफियत में मेरा ख़्याल आता है तुझे … या उठाता है ,जब दुआओं में , तू हाथ .. … तो क्या नाम मेरा भी , याद आता है तुझे ………. बेअदब , बेसबब सी , जब मैंRead More →
यादों की तितली ,रंग बिरंगी,पकड़ी तो बेरंग हो गई ।बहुत चाहा जिसे, सम्भाला भी बहुत ,वही चीज़ अक्सर खो गई।ख्वाहिशों का धुआं करते रहे , इक तमन्ना कहीं बहुत रो गई ।जगाते रहे रोज़ आरज़ू इक नई,और एक चाहत दिल में सो गई।ज़िन्दगी पहुंच गई थी वहां ,मौत होते होते,Read More →
ख़ामोशी तू मेरे साथ चल ,डर लगता है अब कहने में ,सब कुछ तू कहती रहना ,डर लगता है अब सहने में ,तेरा सहारा , मज़बूत लगे ,महफ़िल कितनी अकेली है , लोगों की गिनती ना करना , बस इक तू ही सहेली है । तूने सुना , तूने देखाRead More →
ये लोग भी कितने अजीब है ना,यहाँ जब तक इँसान जिँदा रहता हैं तब तक कोई किसी को नहीं पूछता,लेकिन जेसे ही वह यह दुनिया छोडकर जाता हैं ना,पुरा कायनात स्टेटस डालता हैं,#जय हिंद.. फितरत सोच और हालात में फर्क है वरना,इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नहीं होता।Read More →
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