यूँही नहीं चिराग़ मैंने, हवा में जला दिया…. मुद्दतों से लड़ा हूँ लड़ाई, दुष्वारियों से मैं…. न कभी अश्क़ बहाएन कभी शिकायत की है…. ये मेरी अपनी खता है जो हिमाकत की है…. नफ़रतों के दरम्यां दिलको दिल से मिला दिया…. यूँही नहीं चिराग़ मैंने, हवा में जला दिया…. ………….(एन. पी. सिंह )