कुछ कुछ उलझनों में ,उलझी हुई सी मैं , प्रश्नों और उत्तरों में, लिपटी हुई सी मैं ।
कुछ कुछ उलझनों में ,उलझी हुई सी मैं ,प्रश्नों और उत्तरों में, लिपटी हुई सी मैं ।ढूंढ रही हूं छोर , कोई तो सिरा मिले ,अंधेरे को चीरता हुआ ,रौशन दिया मिले ,हूं अगर मैं ग़लत , तो भी तुझको कुबूल हूं ,मुझ सा ही ग़लत , कोई मुझकोज़रा मिलेRead More →


















