सुबह की पहली किरण से, उस डूबती शाम तक
सुबह की पहली किरण से,उस डूबती शाम तक……ना जाने कितने रंगभरती थी मैं , ज़िन्दगी के ….हर पल ,हर क्षण ,कुछ बाकी ना रहता ।सब भाव , भंगिमाएं ,चटक ,सजीले दिन ,जीवन के ,बीत गयी सदियां ,थक गई मैं …..पर रंग भरना ना छूटा,उन्हें सजाया ,सवांराकुछ बाकी ना रह जाएRead More →


















