एनएएस सर्वेक्षण में प्रदेश की उल्लेखनीय प्रगति पर अधिकारियों और शिक्षकों की सराहना की
शिमला || सुरजीत ठाकुर
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज शिक्षा विभाग की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मामलों और विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में गुणत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर ढांचे और खेल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई नए सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (एनएएस) में प्रदेश की बड़ी छलांग को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि इस सर्वेक्षण में प्रदेश 21वें स्थान से 5वें स्थान पर पहुंच गया है। यह राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों और शिक्षकों के महत्वपूर्ण योगदान का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि बेहतर कार्य कर रहे शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षकों के लिए पुरस्कार योजना पहले ही शुरू की है। योजना के अंतर्गत इस वर्ष से पहली बार कॉलेज शिक्षकों को भी शिक्षक दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।
रोहित ठाकुर ने शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा हर विधानसभा क्षेत्र में खोले जा रहे राजीव गांधी मॉडल डे-बोर्डिंग स्कूलों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि 12 नए डे-बोर्डिंग स्कूलों की आधारशिलाएं रखी गई हैं और इन्हें जल्दी ही आरम्भ कर दिया जाएगा। इसके अलावा, 56 अन्य स्कूलों को डे-बोर्डिंग स्कूलों में स्तरोन्नत किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को अटल आदर्श विद्यालयों का स्वयं निरीक्षण कर शीघ्र रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
शिक्षा मंत्री ने 187 दिव्यांग जेबीटी और 194 शास्त्री शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ ड्राइंग मास्टर्स की भर्ती भी समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल की आवश्यकता और विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर ही शिक्षकों की तैनाती की जाए तथा अनावश्यक डेपुटेशन रद्द कर केवल अति-आवश्यक होने पर ही डेपुटेशन दी जाए।
उन्होंने कहा कि खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों और शून्य परिणाम वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और उन शिक्षकों की पहचान करने को कहा जो बच्चों को गुणत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में बेहतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मेधावी छात्रों को समय पर टैबलेट वितरित करने के निर्देश दिए। उन्होंनेे संयुक्त निदेशक, प्रिंसिपल, प्रवक्ता (पीजीटी) और अन्य शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
रोहित ठाकुर ने कहा कि अगले शैक्षणिक सत्र से कॉलेजों का युक्तिकरण किया जाएगा और नए कौशल आधारित व व्यावसायिक विषय आरम्भ किए जाएंगे। इसके अलावा, उन कॉलेजों में मनोविज्ञान और समाजशास्त्र जैसे विषय भी शुरू किए जाएंगे जहां अभी तक यह विषय नहीं पढ़ाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार खेल को बढ़ावा देने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। राज्य में अंडर-19 राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी और हैंडबॉल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनका पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। इससे प्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर छवि भी बेहतर होगी। खिलाड़ियों के लिए डाइट और यात्रा भत्ते बढ़ाने के साथ-साथ खिलाड़ियों को हॉस्टल सुविधा और यात्रा में एसी ट्रेन व हवाई यात्रा की सुविधा भी दी जा रही है।
मंत्री ने शिक्षा विभाग द्वारा खर्च न की गई धनराशि की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि इसका उपयोग शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि विशेषकर पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (पीडीएनए) के तहत मिली राशि को 75 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त स्कूलों की मरम्मत के लिए खर्च किया जाए।
उन्होंने अनुपूरक पुस्तकों में प्रदेश के इतिहास, संस्कृति और लोक नायकों को शामिल करने के लिए एससीईआरटी और एसआरजी से पाठ्यक्रम सुधार के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि शिक्षा विभाग अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से हिमाचल प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य करेगा।
इस अवसर पर शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने भी गुणत्तापूर्ण शिक्षा को मजबूत करने के लिए अपने सुझाव दिए।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत के. शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।











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