करते रहे वो इक़रार,
हम ख़ामोशी बुनते रहे ,
चर्चे का उन्हें शौक़ रहा,
हम दामन में छिपते रहे ,
दर्दे दिल की दास्तां, दोनों की रही
फर्क बस इतना रहा ,
वो सुनाते रहे, और हम सुनते रहे
हर पल याद आती है,
इसलिए मिलने आते हैं वो ,
हम उन्हीं की याद में ,
छिपके उनसे मिलते रहे ,
धड़कन में अपनी बसा के ,
दिल में उन्होंने बैठा लिया ,
और हर धड़कन पे उनकी ,
नाम की माला हम जपते रहे ,
एहसास ये कराया उन्होंने,
प्यार उनको ही रहा ,
दिल उन्होंने दिया कहां ..
कै़द हमको ही करते रहे
बस कै़द हमको ही करते रहे ।
2020-06-16










