शिमला: हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार चुनावी साल में बड़े मझधार में फंसी हुई नजर आ रही है। दरअसल, प्रदेश सरकार भाल किसी का करने जाती है और नुकसान किसी और को हो जाता है। बीते कल भी जहां सूबे के जयराम ठाकुर ने प्रदेश की महिलाओं के हित को देखते हुए उनके बस किराए में 50% फासदी की छूट देने का ऐलान करते हुए उन्हें लाभन्वित किया।
तो अब वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर सरकार के इस फैसले के विरोध में उतर आए हैं। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार के इस फैसले से उन्हें सीधे तौर पर नुकसान होगा। उनके मुताबिक सरकार को अपने इस फैसले पर एक बार के लिए विचार करना चाहिए।
निजी बस एसोसिएशन के महासचिव नरेश कमल ने इस संबंध में बातचीत करते हुए कहा कि सीएम जयराम के इस फैसले के बाद से निजी बसों में महिलाएं सफर नहीं करेगी।
न्होंने आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार एचआरटीसी द्वारा सरकार द्वारा निर्धारित किराए से कम किराया नहीं लिया जा सकता। सरकार ने 2.19 प्रति किलोमीटर के हिसाब से किराया निर्धारित किया है, लेकिन सरकार द्वारा 15 अप्रैल को की गई 50 प्रतिशत महिलाओं के किराए में छूट को न्यायसंगत नहीं माना जा सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश है कि सरकार परिवहन व्यवसाय को लेकर ऐसा कोई फैसला नहीं कर सकती है, जिसमें सवारियों का बंटवारा हो। उसने कहा कि एक तरफ एचआरटीसी के पास अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए पैसे नहीं हैं।
बिना कलपुर्जों एवं टायर इत्यादि को लेकर के बसें रास्ते में हांफ रही हैं और सरकार ने महिलाओं के किराए में 50 फीसदी की छूट देकर के एचआरटीसी पर और बोझ डाल दिया है। इसलिए एक बार फिर से सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।