Nag Panchami: भगवान शिव के गले में लिपटे नाग के रहस्य जानकर आप भी रह जायेंगे हैरान

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शिव के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव श्मशान में निवास करते हैं शरीर पर भस्म लगाते हैं और गले में नाग को धारण करते हैं।

नाग देवताओं को समर्पित शुभ पर्व नाग पंचमी 25 जुलाई 2020 को मनाया जाएगा नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं की पूजा की जाती है। हर साल यह पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। नाग जहां भगवान शिव के गले के हार हैं, वहीं भगवान विष्णु की शैया भी। लोकजीवन में भी लोगों का नागों से गहरा नाता है। इन्हीं कारणों से नाग की देवता के रूप में पूजा की जाती है। सावन मास के आराध्य देव भगवान शिव माने जाते हैं, साथ ही यह समय वर्षा ऋतु का भी होता है जिसमें माना जाता है कि भूगर्भ से नाग निकलकर भूतल पर आ जाते हैं। वे किसी अहित का कारण न बने, इसके लिए भी नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए नागपंचमी की पूजा की जाती है आपने भगवान शिव के चित्र में उनके गले में लिपटे नाग को देखा होगा। आखिर यह नाग कौन था क्या है इसकी उत्पत्ति का रहस्य जानिए इस संबंध में कुछ खास बातें।

शिव के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव श्मशान में निवास करते हैं शरीर पर भस्म लगाते हैं और गले में नाग को धारण करते हैं। महादेव के इस स्वरूप में कहीं न कहीं गहरे रहस्य भी छिपे हैं। भगवान शिव के गले में लिपटा नाग इस बात का संकेत है कि भले ही कोई जीव कितना भी जहरीला क्यों न हो पर्यावरण संतुलन में उसका भी महत्वपूर्ण योगदान है।

कुछ लोग मानते है की सांप इच्छाधारी होते हैं यानी वे अपनी इच्छा के अनुसार, अपना रूप बदल लेते हैं और कभी-कभी ये मनुष्यों का रूप भी धारण कर लेते हैं। जीव विज्ञान के अनुसार, इच्छाधारी सांप सिर्फ मनुष्यों का अंधविश्वास और कोरी कल्पना है। सांपों से जुड़ी एक मान्यता है कि कुछ सांप मणिधारी होते हैं, विज्ञान के अनुसार, यह मान्यता भी पूरी तरह से अंधविश्वास है क्योंकि दुनिया में अभी तक जितने भी प्रकार के सांपों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है, उनमें से एक भी सांप मणिधारी नहीं है।

  • भगवान शिव के गले में लिपटे नाग का नाम वासुकि है।
  • वासुकि नाग के बड़े भाई का नाभ शेष और अन्य भाइयों का नाम तक्षक, पिंगला और कर्कोटक आदि था।
  • शेष नाग विष्णु के सेवक तो वासुकि शिव के सेवक बनें। वासुकि भगवान शिव के परम भक्त थे वासुकि की भक्ति से प्रसन्न होकर ही भगवान शिव ने उन्हें अपने गणों में शामिल कर लिया था।
  • ऐसा मानते है कि वासुकि का कैलाश पर्वत के पास ही राज्य था। यह भी कहा जाता है कि वासुकी को नागलोक का राजा माना गया है।
  • भगवान शिव के साथ ही वासुकि नाग की पूजा होती है। इसीलिए नागपंचमी पर शेषनाग के बाद वासुकि नाग की पूजा करना भी जरूरी है।
  • समुद्र मंथन के दौरान वासुकि नाग को ही रस्सी के रूप में मेरू पर्वत के चारों और लपेटकर मंथन किया गया था, जिसके चलते उनका संपूर्ण शरीर लहूलुहान हो गया था।
  • वासुकी ने ही कुंति पुत्र भीम को दस हजार हाथियों के बल प्राप्ति का वरदान दिया था। जब भीम को दुर्योधन ने धोखे से विष पिलाकर गंगा नदी में फेंक दिया था तब भीम नागलोक पहुंच गए थे। वहां पर भीम के नानाजी ने वासुकि को बताया कि यह कौन है तब वासुनिक नाग ने भीष का विष उतारा और उसे दस हाजार हथियों का बल प्रदान किया।

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