आज मंगलवार गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है। बता दें कि नवरात्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर महानवमी तक किए जाने वाले पूजन जाप उपवास का प्रतीक है
वर्ष में चार नवरात्र होते हैं। यह चारों ही नवरात्र ऋतु परिवर्तन के समय मनाए जाते हैं। फिलहाल 22 जून यानि कि सोमवार से गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो गई है। और आज मंगलवार गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन है। बता दें कि ‘नवरात्र’ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर महानवमी तक किए जाने वाले पूजन, जाप, उपवास का प्रतीक है। आज के दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-उपासना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति मां ब्रह्मचारिणी की पूजा श्रद्धा रूपेण करते हैं, उसे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। ब्रह्मचारणी- दो शब्द ब्रह्म अर्थात तप और चारणी अर्थात आचरण से मिलकर बना है। इसका भावार्थ है कि मां ब्रह्मचारणी तप करने वाली देवी है। गुप्त नवरात्रि में साधक कठिन पूजा, जप और तप कर उन्हें प्रसन्न करते हैं, जिससे उन्हें मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। आइए, मां का स्वरूप, पूजा का शुभ मुहूर्त, तिथि और पूजा विधि जानते हैं …
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही सोचे गए सभी काम पूरा करने के लिए प्रेरणा मिलती है। मां ब्रह्मचारिणी के मुखमंडल पर कांतिमय आभा झलकती है, जो मां की ममता का अलौकिक स्वरूप है। मां अपने दाहिने हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण की हैं। इन्हें विद्या की देवी और वैरागी कहा जाता है। अतः विद्यार्थियों और साधकों को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा जरूर करनी चाहिए।
-मां को लाल रंग का पुष्प जरूर अर्पित करें। इससे मां यथाशीघ्र प्रसन्न होती हैं।
-अंत में आरती-प्रार्थना करें। अपनी क्षमता अनुसार व्रत करें। शाम में आरती-प्रार्थना के बाद फलाहार करें










