Bahula Chaturthi: आज है बहुला चतुर्थी, जानें इसकी पौराणिक कथा

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शास्त्रों के अनुसार, बहुला चतुर्थी के दिन व्रत रखने से संतान के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और संतान को लंबी आयु की प्राप्ति होती है।

डेस्क। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चौथ मनाया जाता है। इसे बहुला गणेश चतुर्थी भी कहा जाता हैं। 7 अगस्त यानि आज बहुला चतुर्थी मनाया जाएगा। बहुला चतुर्थी व्रत में गौ पूजन का बहुत खास महत्व होता है। इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी होने के कारण यह व्रत भी किया जाएगा। इस दिन श्री कृष्‍ण भगवान का पूजन भी किया जाता है। इस दिन महिलाएं संतान की लंबी आयु की कामना के लिए उपवास रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार, बहुला चतुर्थी के दिन व्रत रखने से संतान के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और संतान को लंबी आयु की प्राप्ति होती है। बहुला चतुर्थी व्रत में गाय-बछड़े की पूजा को खास महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि बहुला चतुर्थी व्रत संतान को मान-सम्मान और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला होता है। निसंतान को संतान सुख की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से संतान को कष्टों से मुक्ति मिलती है और धन-धान्य में वृद्धि होती है।

कथा
इसके पीछे एक यह कथा भी प्रचलित है कि एक बार बहुला नामक गाय जंगल में चरते-चरते काफी दूर जा पहुंची, जहां एक शेर उसे खाने के लिए रोक लेता है। तब बहुला गाय द्वारा अपने भूखे बछड़े को दूध पिलाकर वापस आने की शेर से विनती करने पर शेर उसे छोड़ देता है। तब शेर द्वारा बहुला गाय को छोड़ने पर उसे शेर योनि से मुक्ति मिल जाती है तथा वह अपने पूर्व रूप अर्थात गंधर्व रूप में प्रकट होता है। इसीलिए इस दिन महिलाओं द्वारा दिनभर उपवास रखकर शिव परिवार की पूजा के साथ बहुला नामक गाय की पूजा भी की जाती है।

बहुला चौथ व्रत के संबंध में ऐसा माना जाता है कि इस दिन गाय का दूध एवं उससे बनी हुई चीजों को नहीं खाना चाहिए। इस व्रत को करने से अच्छा फल मिलता है, घर-परिवार में सुख-शांति आती है, मनुष्‍य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत करने से परिवार पर आ रहे विघ्न संकट तथा सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं तथा यह व्रत जन्म-मरण की योनि से मुक्ति भी दिलाता है।


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