इक आग,इक तपन, रोज़ नयी चाहिए , ये है इनसां की फितरत, कुछ अलग चाहिए
इक आग,इक तपन,रोज़ नयी चाहिए ,ये है इनसां की फितरत,कुछ अलग चाहिए ।देश सुख का हो ,चाहत दिल की ये है ,साथ दुखों का भी ,इक नगर चाहिए ।हकीकत तो ये है,किअब वफ़ा ही नहीं ,बेवफाओं का फिर भी,भरम चाहिए ।अपनों से हमें ,चाहेमिले न कुछ भले ,गैरों का हीRead More →
















