खिली सी रंगत पर , हजारों रंगीन अफ़साने लिखे । बेगैरत सादगी आ कर क्यों , मौसम बिगाड़ देती है ??
खिली सी रंगत पर , हजारों रंगीन अफ़साने लिखे ।बेगैरत सादगी आ कर क्यों , मौसम बिगाड़ देती है ?? खिली हो धूप-छांह में , तमस में चांदनी का जलवा ।खामोशी छेड़ती है राग , नीरव में गजल का मसला ।। अनजान सी रागिनी आकर , तरन्नुम बिगाड़ देती हैRead More →


















