भोले की भक्ति के इस मास में लड़कियों और महिलाओं के व्रत और त्योहार आते हैं. सुहागनों के बीच हरियाली तीज का अपना ही महत्व है. राजस्थान, बिहार और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
डेस्क। सावन के पावन महीने में कई त्योहार आते हैं उन्ही में से हरियाली तीज का पावन पर्व भी आता है पति की लम्बी उम्र के लिए सुहागिन महिलाएं यह हरियाली तीज का व्रत रखती हैं। इसकी महत्ता भी करवा चौथ की तरह ही है। हरियाली तीज को श्रावणी तीज के नाम से भी जाना जाता हैं। हरियाली तीज सावन मास का सबसे महत्वपूर्ण पर्व हैं। हरियाली तीज सौंदर्य और प्रेम का पर्व हैं सावन का महीना अपने साथ कई त्योहार भी लेकर आता है भोले की भक्ति के इस मास में लड़कियों और महिलाओं के व्रत और त्योहार आते हैं सुहागनों के बीच हरियाली तीज का अपना ही महत्व है राजस्थान, बिहार और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
महत्व
साल में कुल चार तीज मनाई जाती हैं, जिनमें हरियाली तीज का विशेष महत्व है इस बार यह त्योहार 23 जुलाई को मनाया जाएगा हरियाली तीज सावन माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है यह श्रृंगार और उल्लास का पावन पर्व है तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की शादी की जाती है हरियाली तीज के दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं वहीं कई जगहों पर कुवांरी लड़कियां अच्छे पति कीइच्छा में इस व्रत को करती हैं ऐसा माना जाता है की तीज का व्रत रखने से विवाहित स्त्रियों के पति की उम्र लंबी होती है और अविवाहित लड़कियों को मनचाहा जीवन साथी मिलता है
तीज कब-कब आती है
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार साल में कुल चार तीज मनाई जाती हैं।
- आखातीज को अक्षय तृतीया तीज भी कहते हैं बैसाख महीने की शुक्ल पक्ष तृतीया को अक्षया तृतीया तीज मनाई जाती है।
- हरियाली तीज सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है।
- कजरी तीज भाद्रपद यानी कि भादो माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज मनाई जाती है।
- हरतालिका तीज भादो माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है।
हरियाली तीज कैसे मनाते हैं?
हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं दिन भर व्रत रखती हैं. इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और मेहंदी लगाने के साथ ही हरे रंग के कपड़े और हरी चूड़ियां पहनती हैं पुरे स्त्रियां तीज के गीत गाती हैं और नाचती हैं इस दिन महिलाएं मिलकर झूला भी झूलती हैं शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है हरियाली तीज के दिन सुहागिन स्त्रियों को घर के बड़े-बुजुर्ग या सास-ससुर श्रृंगार दान देते हैं।










