शुभ मुहुर्त में जलाभिषेक करना श्रेष्ठ फलदायी

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पं. प्रतीत शर्माने कहा कि श्रावण मास में शिव के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। किसी भी शिवालय में जल से शिव का अभिषक करने से अकाल मृत्यु का हरण होता है।

ज्वालामुखी। पं. प्रतीत शर्मा ने कहा कि श्रावण मास में शिव के जलाभिषेक का विशेष महत्व है। किसी भी शिवालय में जल से शिव का अभिषक करने से अकाल मृत्यु का हरण होता है। इस बार 16 जुलाई को कामदा एकादशी व श्रावण संक्रांति या कर्क संक्रांति एक ही दिन है। इस दिन रोहिणी नक्षत्र में शिव का अभिषेक प्रातः 10.35 के बाद बहुत ही शुभ फलदायी होगा।

उन्होंने बताया कि इसके बाद शनि प्रदोष 18 जुलाई के दिन होगा, जो शनि के दोषों का शमन करने वाला होगा। इस दिन प्रदोष काल में शिव पर जल चढ़ाना शनि की साढ़ेसाती, ढैया, जन्म दशा  के कुफल को समाप्त करता है। प्रदोष काल 19.28 से 21.30 तक रहेगा। ये सर्वोत्तम समय जलाभिषेक का होगा। इसके बाद 19 जुलाई को रविवार आद्रा नक्षत्र में शिव चौदस होगी। 

इस पूरे दिन शिव का अभिषेक किया जा सकता है, परन्तु इस दिन मिथुन लगन में जलाभिषेक बहुत ही  शुभ होगा। जो कि प्रात 7.52 तक रहेगा। इसमें भी रात्रि काल में चौदस में जलाभिषेक अति उत्तम होगा। जो कि 21 बजकर 30 मिनट से से 23 बजकर 33 मिनट तक होगा। श्रवण मास के इन मुहूर्त में जलाभिषेक करने से उत्तम फल की प्राप्ति होगी।


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