आग होती , तो बुझ जाती , आह होती , तो निकल जाती ,

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आग होती , तो बुझ जाती , आह होती , तो निकल जाती ,
क्या तुम्हें ख़बर है, ये क्या है ? प्यास होती , तो पी लेते ,
राह होती , तो चल देते ,क्या जानें हम ,
कि ये क्या है …. दर्द होता , तो दब जाता ,
ज़ख्म होता , तो भर जाता , दे कोई हमें ज़वाब ,ये क्या है ?
बीमार होते , तो दवा होती , कोई तो ऐसी , दुआ होती ,
रब ही जाने , ये माजरा क्या है ? सवाल होता , तो जवाब होता ,
किसी का देखा , ऐसा हाल होताजिस पे बीते ,
वही जाने ….. कि ये क्या है ।


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