सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से मनुष्य की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। इस माह से ही चातुर्मास लगता है। पुराणों में बताया गया है कि अन्य दिनों की अपेक्षा सावन में शिव की सच्चे मन से पूजा करने पर कई गुना लाभ मिलता है।
सावन का महीना चल रहा हैं। यह महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से मनुष्य की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। इस माह से ही चातुर्मास लगता है। पुराणों में बताया गया है कि अन्य दिनों की अपेक्षा सावन में शिव की सच्चे मन से पूजा करने पर कई गुना लाभ मिलता है। इस संपूर्ण माह में जहां नया जीवन विकसित होता है वहीं पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है। इसीलिए इस माह में उत्तम भोजन, फल या व्रत रखने की हिदायत दी जाती है लेकिन इन 10 लोगों को व्रत नहीं रखना चाहिए।
सावन मास विशेष
-जिन लोगों की शारीरिक स्थिति ठीक न हो उसे भी व्रत नहीं रखना चाहिए। उसे उत्तम फल और भोजन का उपयोग करना चाहिए।
-घर-गृहस्थी में बहुत से ऐसे कई महत्वपूर्ण काम होते हैं जिनको करना होता है। जिनको करने से शारीरिक या मानसिक श्रम लगता है और मानसिक कष्ट होता हो तो भी व्रत नहीं रखना चाहिए।
-बच्चों और बूढ़ों को भी अपनी शारीरिक स्थिति अनुसार व्रत नहीं रखना चाहिए या वे व्रत के खाद्य पदार्थ खाकर व्रत रख सकते हैं।
-व्रत करने से उत्तेजना बढ़े और व्रत रखने पर व्रत भंग होने की संभावना हो तो ऐसे असंकल्पी व्यक्ति को भी व्रत नहीं करना चाहिए।
-रजस्वरा स्त्री को भी व्रत नहीं रखना चाहिए।
-अगर कहीं पर जरूरी यात्रा करनी हो तब भी व्रत रखना जरूरी नहीं है।
- रोग या बुखार आदि स्थिति में भी व्रत नहीं रखना चाहिए।
-अशौच अवस्था में व्रत नहीं करना चाहिए। अशौच अर्थात अशुद्ध, मलिनता आदि।
नोट: श्रावण मास में खासकर भूमि शयन और ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी होता है। और व्रत के दौरान यदि फलों का ही सेवन करते हैं तो अति उत्तम।










