अब मै समझ गया हूँ मआशरे के उसूलों को
नहीं संभालता तो, मै उस कीचड़ मे गिर जाता।
न दी तवज्जो उनके बे-तुके गुफ़्तगू को
जो होता शरीक उसमे, तो गुनहगार मै बन जाता।
न दे इतनी एहमियत किसी बद्द-दिमाग मग़रूर को
थोड़ी इज़्ज़त गर किसी ग़रीब को देते, तो वो तेरा परस्तार बन जाता।
क्या फायदा उस इंसान को एहतराम देने मे, जिसे तेरी परवाह न हो
गर इतना प्यार किसी जानवर को देते , तो वो तेरा वफादार बन जाता।
क्या रखा है ज़माने को दिखाने मे, गर नेमतों से नवाज़ा है तुझको?
दान देते किसी बेकस ज़रूरतमंद को तो तू खुदा का अज़ीज़ बन जाता।










