शिव चालीसा
2021-08-22
दोहा श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला सदा करत सन्तन प्रतिपाला भाल चन्द्रमा सोहत नीके कानन कुण्डल नागफनी के अंग गौर शिर गंग बहाये मुण्डमाल तन छार लगाये वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे छवि को देख नाग मुनि मोहे मैना मातु की ह्वै दुलारी बाम अंग सोहत छविRead More →









