राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है।

रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है भाई की कलाई में राखी बांधने के लिए बहनें रक्षाबंधन का इंतजार करती है वहीं भाई को भी इस दिन का इंतजार रहता है वो भी बहनों से राखी बंधवाने को बेताब रहते हैं रक्षाबंधन का त्योहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है इस सावन के आखिरी सोमवार यानि 3 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार पड़ रहा है भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन इस बार बहुत खास होगा क्योंकि इस रक्षाबंधन पर सर्वार्थ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान का शुभ संयोग बन रहा है रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आया है। साथ ही इस साल भद्रा और ग्रहण का साया भी रक्षाबंधन पर नहीं पड़ रहा है राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है।
रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का त्योहार है रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य होता है। इस दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है।
राखी बांधने के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए मान्यता है कि रावण की बहन ने उसे भद्रा काल में राखी बांधी थी इसलिए उसका विनाश हो गया था. ज्योतिष के अनुसार, इस बार की राखी के दिन यानि 3 अगस्त को सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक भद्रा है इसलिए राखी का त्योहार सुबह 9 बजकर 30 मिनट से शुरू हो जाएगा।
इसके बाद दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 35 मिनट तक राखी बांधने के लिए बहुत ही अच्छा समय है। फिर शाम 7 बजकर 30 मिनट से लेकर रात 9.30 बजे तक बहुत ही अच्छा मुहूर्त है. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. इसमें राखी बांधने पर सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं राखी पर इस बार आयुष्मान दीर्घायु योग भी बन रहा है, इसका मतलब यह है कि राखी बंधवाने वाले भाई और बांधने वाली बहन दोनों की आयु लंबी होगी 3 अगस्त को सावन की पूर्णिमा भी है ऐसा संयोग बहुत कम आता है कि सोमवार के दिन सावन की पूर्णिमा पड़ जाए इस तरह इस बार के रक्षाबंधन के दिन बहुत ही अच्छे ग्रह नक्षत्रों का संयोग बन रहा है।










