मेरा गुरू ….
जीवन के इस सफ़र में , जो सीख मुझको दे गया , वो ही गुरू मेरा बना , वो ही गुरू मेरा बना ।
फूलों ने मुझको सिखाया , कैसे दुःख में खुश रहें । पानी ने मुझको सिखाया , कैसे अपनी राह चुनें ।
पेड़ों ने मुझको सिखाया , कैसे विनम्र हम बनें । एक लौ ने मुझको सिखाया , कैसे अंधेरे से लड़ें ।
मां ने मुझको सिखाया , कैसे प्यार सबसे करें । पिता ने मुझको सिखाया , कैसे दुष्टों से लड़ें ।
भाई ने मुझको सिखाया , कैसे रक्षक हम बनें । दोस्तों ने मुझको सिखाया , कैसे रिश्ते सार्थक करें ।
अध्यापक ने मुझको सिखाया , कैसे सच की राह चलें । संत ने मुझको सिखाया , कैसे क्रोध पर संयम रखें ।
हरिजन ने मुझको सिखाया , कैसे मन का मैल,साफ़ करें । तपस्वी ने मुझको सिखाया , कैसे लक्ष्य पाने को,तप करें । जन्म ने मुझको सिखाया , कैसे जीवन हम जियें । मृत्यु ने मुझको सिखाया , कैसे सबका त्याग करें ।
हर पल हर क्षण है गुरु , गुरु की महिमा, हम कैसे करें । हर दिन सिखाये, कुछ नया गुरू, गुरु की शरण मे , हम रहें ।
2020-07-06










