बरसों तलक होती रही, मुलाक़ात हमारी ,
इक बात न कह पाई , ज़माने गुज़र गये ।
पल पल पे देते रहे हैं , वादों पे
जान जो ,
ढूंढा,तो न मिले,आज वो दीवाने
किधर गये ।
किस्से ‘औ ‘ कहानियों सी,
मिलती है दास्तां,
हकीकत जो मिली ,तो फ़साने
बिखर गये ।
तेरा ही था भरम ,जो आ गये
हम यहां ,
देखा जो मुड़के हमने ,तो रास्ते
बिछड़ गये ।










